श्रद्धेय स्व.अर्जुन सिंह जी स्वतंत्र भारत के उन चुनिंदा अग्रणी जनप्रतिनिधियों में एक हैं जिनकी बुद्धि, बुद्धिमत्ता, दूरदृष्टि, मानवीयता और सम्वेदना की सानी बहुत कम मिलती है l
उनकी स्मृति, योजनाओं और कार्यशैली को संग्रहित कर भावी पीढियों के मार्गदर्शन के लिये सुरक्षित रखने की पहल सद्भावना फाउंडेशन की स्थापना है l
अर्जुन सिंह जी की पुत्री, मेरी बहन, वीना फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं और उन्होंने मुझे एक सदस्य के रूप में जुड़ने का सौभाग्य दिया है l
मेरे लिए अर्जुन सिंह जी एक अतिविशिष्ट नेता ही नहीं थे मेरे लिए वह ' अर्जुन अंकल ' थे l
हमारे परिवारों में दो पुस्त की दोस्ती और अब तीसरी पीढ़ी में भी वही नजदीकियों चली आ रही हैं ।
मेरे लिए उस अनुभव को एक लेख में व्यक्त करना असंभव है l मैंने जब से होश संभाला उनकी बेटी वीणा निरंतर पिछले 60 वर्षों से पूर्ण अपनत्व से मेरी राखी बहन रही हैं और मुझ से नियमित रूप से हर साल राखी का बंधन निभाया l
वीणा संस्था की अध्यक्ष ही नहीं बल्कि पूरी जिम्मेदारी से अपने काम को करने के साथ-साथ हम सबको भी अपनी अपनी जिम्मेदारियां का हर समय आभास कराती हैं ।
मुझे अर्जुन अंकल के लिए इन शब्दों में व्यक्त करना उचित रहेगा - वह मेरे परिवार के एक सदस्य के रूप में थे और मेरे पिता के सहपाठी और मेरी मां को अर्जुन आंटी दीदी बोलती थी l
इन्हीं रिश्तों से सब व्यक्त हो जाता है कि मेरे लिए वह क्या थे और हमेशा क्या रहेंगे ।
जब मैने कॉलेज पास करके अपना व्यापार शुरू किया तो उन्होंने मुझे हमेशा प्रोत्साहित करके यही कहा कि जो भी तुम करते हो उसमें गरीबों की भलाई के लिए भी एक अंश रखना और हमेशा सोचना l
उनकी यह सीख मेरे लिए एक सेवा भावना की नींव बन गई। मैंने अपने पूरे सामन्य और राजनीतिक जीवन में हमेशा इस बात का ध्यान रखा कि मैं जरूरतमंदों की सेवा हर समय हर तरीके से करने की कोशिश करते रहूँ l
मैंने पिछले 59 वर्ष के राजनीतिक जीवन में उनकी हर बात को ग्रहण करने की कोशिश करी और समय समय पर उनसे मार्गदर्शन भी लिया।
मेरे लिए वे जन नेता से बढ़कर थे l उनकी दूरदर्शिता और चाणक्यनीति हर परिस्थिति में देश सेवा के काम आयी। उनका पूरा व्यक्तित्व ही गरीबों के मसीहा और धर्मनिरपेक्षता के आधार पर टीका था। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवन को देश सेवा में लगा दिया।
आज देश के एक महान सपूत और मेरे निजी परिवर के बड़े को नमन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है l