माननीय स्वर्गीय श्री अर्जुनसिंह जी स्वालंबन कार्यक्रम

मेरा सौभाग्य रहा कि माननीय स्वर्गीय श्री अर्जुनसिंह जी के आशीर्वाद से मुझे सन 1980 में विधानसभा क्षेत्र भानुप्रतापपुर से मुझे इंदिरा कांग्रेस से प्रत्याशी बनाया गया विधानसभा चुनाव में निर्वाचित होने के पश्चात् श्री अर्जुनसिंह जी के मंत्री परिषद में राज्य मंत्री के रूप में शामिल होकर उनके नेतृत्व में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ, माननीय स्वर्गीय श्री अर्जुनसिंह जी कुशल राजनीतिज्ञ थे उनके हृदय में शोषित उपेक्षित दलित वर्गों के विकास के प्रति चिंतन हमेशा जीवंत रहता था।

मुख्यमंत्री के रूप में आदिवासी बाहुल बस्तर के प्रति विशेष स्नेह रहा वर्तमान छत्तीसगढ़ उस समय मध्यप्रदेश का अंग था छत्तीसगढ़ के पिछड़े आदिवासी अनुसूचित जनजाति के राजनीतिज्ञो को अपने मंत्रीमंडल में सम्मिलित किया जिसमें श्री झुमुकलाल भेड़िया, डा. टुमान लाल, श्री वेदराम, डा. भंवर सिंह पोर्ते, बंशीलाल जी श्री बी.आर. यादव जी, गंगा पोटाई, श्री मानकुराम सोढ़ी, देवेन्द्र कुमारी, सिंह देव मोतीलाल वोरा, अजित जोगी को अवसर प्रदान कर छत्तीसगढ़ के प्रति अपने और बहुजन समाज के राजनितिक उत्थान के साथ, नैसर्गिकी संपदा से भरपूर क्षेत्र के विकास के प्रति अपने कर्तब्य बोध का उदाहरण प्रस्तुत किया।

1980 में मुख्यमंत्री बनने के पश्चात सुदूर बस्तर आगमन में पिछड़े आदिवासी बाहुल क्षेत्र के निवासियों, उनके क्षेत्रीय विकास के लिए कुछ करने की जिज्ञासा के कारण ही मंत्री परिषद की बैठक बस्तर में करके उनकी मानवीय संवेदना प्रदर्शित करता है बस्तर को संभाग का दर्जा दिलाया। 1987 में खरसिया से उपचुनाव लड़ना वनोपज का राष्ट्रीयकरण कर शोषण से मुक्ति दिलाकर वनों पर अधिकार दिलाया।

छत्तीसगढ़ विकास प्राधिकरण का गठन कर वरिष्ठ आदिवासी नेता श्री झुमुकलाल भेड़िया को उपाध्यक्ष बनाना छत्तीसगढ़ के प्रति आत्मीयता का दर्शन मिलता है। झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले वंचित वर्गों जहाँ वे निवास में रहते थे, उनको इंदिरा आवास योजना का लाभ देकर आवास का स्थायी पट्टा प्रदान कर खेती करने के लिए भूमिहीन लोगों को कृषि भूमि का पट्टा देकर मजूदर से मालिक बनाया। 

पूर्व मे ठेकेदारों के माध्यम से तेदूपत्ता तुड़वाई होती थी पैसा ठेकेदारों के तिजोरी में जाता था। श्री अर्जुनसिंह जी ने ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर सहकारी समिति के माध्यम से तेदूपत्ता तुड़वाई का निर्णय लिया जो पैसा ठेकेदारों के तिजोरी में जाता था उसको मजूदर से मालिक बना कर हक दिया, एक अविश्वनीय निर्णय लेकर वनवासियों के जीवन में सदैव के लिए मुस्कान बिखेर दिया।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुविधा के लिए अपने आपको इसलिए सौभाग्यशाली मानती हूँ क्योंकि उनके ही मार्गदर्शन में उनके विचारों के अनुरूप कार्य करने का अवसर मिला निश्चित रूप में मेरे गुरु, मार्ग दर्शक के अतिरिक्त पुत्री का स्नेह भी हमेशा मिला। उनके ही कारण राष्ट्रीय महिला आयोग के साथ कांग्रेस के सर्वोच्च संस्था C.W.C. में माननीय सोनिया जी के नेतृत्व में कार्य करने का अवसर मिला

माननीय श्री अर्जुनसिंह जी के शिष्य के रूप में उनके इच्छा के अनुरूप दूरस्थ बस्तर के निवासियों को प्रशासनिक सुविधा के दृष्टि से माननीय दिग्विजय सिंह जी ने नये जिलों का निर्माण किया। अधिकार अभियान कमेटी के अध्यक्ष के रूप में वंचितों को अधिकार प्राप्त करने का रास्ता प्रस्तुत किया और आगे चल कर उनके विचारों के अनुरूप कार्य कर उनके सपनों को साकार किया।

मेरे प्रति उनका स्नेह आज भी मुझे एहसास दिलाता है उनकी आकृति सदैव मेरे नजरों में है।

                               ( गंगा पोटाई ठाकुर ) 

                                      पूर्व मंत्री 

                                  मध्यप्रदेश शासन